ઘણા સમયથી મારા સૌથી પ્રીય ભક્તિ-ગીતોમાથી એક ભક્તિ-ગીત મારે મારા વાંચકમિત્રો સુધી પહોચાડવું હતું, જેના શબ્દો એટલા સુંદર અને ચોટદાર છે કે કોઈ પણ માણસને અસર કરી જાય.

મને આશા છે કે તમને આ ભક્તિ-ગીત જરૂર ગમશે.

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फ़ायदा
कभी गिरते हुवे को उठाया नहीं
बाद आंसू बहाने से क्या फ़ायदा

में तो मंदिर गया, पूजा आरती की
पूजा करते हुवे ये ख्याल आ गया
कभी माँ बाप की सेवा की ही नहीं
सिर्फ पूजा के करने से क्या फ़ायदा

में तो सत्संग गया गुरुवाणी सूनी
गुरुवाणी को सुनकर ख्याल आ गया
जन्म मानव का लेके दया न करी
फिर मानव कहलाने से क्या फ़ायदा

मैंने दान किया मैंने जपतप किया
दान करते हुवे ये ख्याल आ गया
कभी भूखे को भोजन खिलाया नहीं
दान लाखो का करने से क्या फ़ायदा

गंगा नहाने हरिध्वार काशी गया
गंगा नहाते ही मनमे ख्याल आ गया
तन को धोया मगर मन को धोया नहीं
फिर गंगा नहाने से क्या फ़ायदा

मैंने वेद पढ़े मैंने शाश्त्र पढ़े
शाश्त्र पढ़ते हुवे ये ख्याल आ गया
मैंने ज्ञान ही किसी को बताया नहीं
फिर ज्ञानी कहेलाने से क्या फ़ायदा

माता पिता के ही चरणोंमे चारो धाम हे
आजा आजा यही मुक्ति का धाम हे
पिता माता की सेवा की ही नहीं
फिर तीर्थो में जाने से क्या फ़ायदा

શબ્દાંકન પ્રેરણા સ્ત્રોત: http://www.jaibapasitaram.com/site/lyrics/k/kabhipyaase.htm

જો તમારે અંગ્રેજી શબ્દાંકન (English Sub-title) સાથેનો વિડીયો જોવો હોય તો http://www.youtube.com/watch?v=6eYzP3akQH4